न चिठ्ठी न कोई संदेश, कहां चले गये तुम..... ?

"विनम्र श्रंद्धाजलि"
न चिठ्ठी न कोई संदेश, कहां चले गये तुम..... ?


           श्रीगोपाल गुप्ता 


दुनिया के बेहतरीन संपादकों में शुमार व दैनिक पंजाब केसरी दिल्ली के प्रधान संपादक इन निदेशक आदरणीय श्री अश्विनी कुमार का मात्र 63 वर्ष की आयु में महाप्रयाण हो गया! शनिवार 18 जनवरी को सुबह 11-30 बजे वे इस नश्वर संसार को हमेशा के लिए अलविदा कह कर अपने परिवार, पंजाब केसरी के करोड़ों पाठकों व भारतीय पत्रकार जगत को बड़ी छत्ति दे गये, जिसकी निकट भविष्य में भरपाई होना असंभव है! अश्वनी यूं तो 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर व पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्वर्गीय श्रीमती सुषमा स्वराज व स्वर्गीय अरुण जेटली के मनाने पर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर करनाल हरियाणा से सांसद चुनकर आये, मगर उनकी लेखनी में 2014 से 2019 तक सत्ता की छाप कहीं नजर नहीं आई, सच यह कि सच के साथ उन्होने कोई समझोता नहीं किया! उनकी नजर में जो सच और देशहित में था वही उनकी संपादकिय के अक्षरों में अंकित रहा ! अमर शहीद श्रोमणी लाला जगत नारायण के ज्वेष्ठ पौत्र एवं शहीद श्री रमेश चन्द्र के ज्येष्ठ पुत्र अश्विनी कुमार जिन्हें लोग प्यार और स्नेह से मिन्नाजी भी कहते थे, ने अपने लोकप्रिय अखबार दैनिक पंजाब केसरी और सत्य के साथ कभी समझौता नहीं किया! जो विरासत उन्हें लाला जगत नारायण व श्री रमेश चन्द्र से मिली उसका उन्होना बहुत जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया जो कि उनकी बेबाकी संपादकिय में झलक थी! विरासत भी बहुत महान और गर्वीली व ऐतिहासिक थी,उल्लेखनीय है कि पंजाब केसरी व पत्रकार जगत के भीष्मपितामह लाला जगत नारायण और पिता श्री रमेश चन्द्र ने देश के लिए एक पिता-पुत्र के रुप में जो शहादत दी वह विश्व के पत्रकार जगत में एकमात्र अनोखी मिशाल और इतिहास है! 


लाला जगत नारायण को 9 सितम्बर 1981को और श्री रमेश चन्द्र को 12 मई 1984 को आंतकवादियों ने गोली से भून डाला! ये वो समय था जब हमारे मिन्ना जी राष्ट्रीय स्तर पर ईरानी ट्राफी और रणजी ट्राफी में काफी नाम कमाने के बाद भारतीय क्रिकेट में तेजी से आगे बढ़ रहे थे, मगर लाला जी की देश पर शहादत के बाद उन्हें बैट-बाॅल की जगह कलम उठानी पड़ी जिसमें उन्होने अपने-आपको एक श्रेष्ठ संपादक और देशप्रेमी साबित किया! मेरी पहली मुलाकात आदरणीय श्री मिन्ना जी से सन् 2002 में उस समय हुई जब उन्होने अपनी कलम से मुझे मध्यप्रदेश के मुरैना जिले का दैनिक पंजाब केसरी का जिला संवाददाता नियुक्त किया था! संवाददाता बनाते समय एक संक्षिप्त साक्षात्कार में उन्होने जोर देकर कहा कि तुम आज से पंजाब केसरी के संवाददाता दाता हो गये हो तो ध्यान रखना जनता की आवाज बनकर मुझे दिखाना!मुरैना जिले के कोई भी बंचित और मजबूर की आवाज तुम्हारे रहते दबनी नहीं चाहिए और बैखौफ होकर समाचार भेजते रहना मेरा वादा कोई भी खबर कभी बिना छपे नहीं रहेगी! और ऐसा ही हुआ, तब से अब तक अनवरत पंजाब केसरी में मुरैना के समाचारों को अहमियत मिलती रही है! ऐसे बेखोफ और दंबक मगर जनता की आवाज के फिक्रमंद श्री अश्विनी कुमार का हमारे बीच से मात्र 63 वर्ष की आयु में चले जाना हमारे पत्रकार जगत के लिए महान छत्ति है। उनकी लिखने की जिद भी एक कहानी के साथ-साथ मिशाल और इतिहास तब बन गई जब उन्होने अपने महाप्रयाण के अंतिम समय में भी मौत को सामने खड़े देखने के बावजूद पाठकों के लिए अपनी अंतिम संपादकिय को लिखा! ऐसी महान शख्सियत को शत-शत नमन् एवं भावभीनी विन्रम श्रंद्धाजलि अर्पित!